Sunday, 23 October 2011

वो दिया मैं खुद बन जाउंगी.....

अब की दिवाली कुछ ऐसे मनाऊंगी
अँधेरा रहे न किसी की जिन्दगी में...
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी,
अब के दिवाली ऐसी मनाऊंगी...

शत-शत नमन करती हूँ उन माता-पिता को,
जिन्होंने हमारी जिन्दगी को रोशन करने के लिए
खुद को  दिए की तरह जलाया है...
उनकी जिन्दगी में अँधेरा न रहे एक पल भी,
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी,
अब के दिवाली ऐसी  मनाऊंगी....                                      

बहुत प्यार देती हूँ उन भाई-बहनों को
जिनकी शरारतो से घर रोशन रहता है हमेशा 
उनकी जिन्दगी खुशियों से रोशन रहे हमेशा 
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी,
अब के दिवाली ऐसी मनाऊंगी.... 

यादे जुडी है उस घर से 
जिसने मुझे सम्हाला,अपना बनाया,
जिसकी दीवारों ने भी मुझसे बाते की है,
उस घर में कभी अँधेरा न हो,
दिया बन रौशनी मैं फैलाऊँगी 
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी,
अब के दिवाली ऐसी मनाऊंगी....

साथ रहे हमेशा उन सखियों का 
जिनके साथ हँसने-रोने के पल बीते है,
जिनसे अपने सपने भी बांटे है मैंने,
इन सखियों के साथ से यूँ ही
जिन्दगी रोशन करती जाऊंगी,
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी...
अब के दिवाली ऐसी मनाऊंगी......

संजो कर रखूंगी हर उस याद,लम्हे,प्यार, 
ख्वाब को,जो जिन्दगी ने मुझे दिए है,
रिश्तो की महक,प्यार का एहसास से,
रोशन रहे मेरे अपनों की जिन्दगी 
रौशनी धूमिल न हो एक पल भी
वो दिया मैं खुद बन जाऊंगी,
अब के दिवाली ऐसी मनाऊंगी......


Tuesday, 18 October 2011

मेरे होने का सबब होता है...... !!


तुम्हारा मेरी जिन्दगी में होना                                       
मुझे शब्दों से जोड़े रखता है...


तुम्हारे ख्वाबो का होना
मेरी बेरंग तस्वीरो में रंग भरता है...


तुम्हारा हर जवाब 
मेरे सवालो का अर्थ होता है....


तुम्हारी धड़कनो का धड़कना
मेरे होने का सबब होता है...... 

Thursday, 6 October 2011

नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

तुम्हारे संग रहती हूँ ऐसे,                                           
दिया संग बाती हो जैसे....

तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
सागर में बूंद रहती हैं जैसे....

तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ ऐसे,
पिया के इंतज़ार में बरसो से
पपीहा पुकारती हो जैसे.....

तुम्हारे हर सफ़र पर साथ चलती हूँ ऐसे,
तुम संग परछाई रहती हो जैसे......

तुम्हे खुद में महसूस करती हूँ ऐसे,
दिल में धड़कने धड़कती है जैसे.....

तुम्हे कैसे बताऊ,
कि प्यार करती हूँ तुम्हे,
कितना और कैसे?
नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

Tuesday, 27 September 2011

जिन्दगी चलने लगी...... !!

जब ठहरी सी लगी जिन्दगी,
तो घबरा कर मैं चलने लगी
जब भी हार कर थम गए कदम,
तो देखा जमी चलने लगी...

नजरो से दूर मंजिल ठहरी सी लग रही थी,
मैं जैसे ही बढ़ी मंजिल की तरफ 
तो देखा मंजिल भी चलने लगी...

मैं भाग रही थी जितनी भी,
अपनी परछाई से 
जा तो रही थी महफ़िल में,
पर देखा मेरे साथ
मेरी तन्हाई भी चलने लगी...

मैं भूलना चाहती थी,
अतीत की यादो को
छोड़ कर जैसे ही
इन यादो को आगे बढ़ी,
पर मुड कर देखा मेरे साथ,
यादे बन कर परछाई चलने लगी...

जब चल रहे थे सभी मेरे साथ,
मैं ठहर जाना चाहती थी
कुछ पल ही गुज़रे
तो देखा मैं ठहरी ही रही 
जिन्दगी चलने लगी.....!


Tuesday, 20 September 2011

फिर खोई सी थी......!!!


छत पर बैठी तन्हा,                                  
खोई-खोई सी थी,
वो कुछ न बोली,
उसकी आखें बोल रही थी,
वो रात भर नही सोयी थी..
एक टक कर रही इंतजार,
किसी अपने का 
वो नही आया टुटा उसका भ्रम,
वो बहुत रोई थी, 
आंसुओ में अपने दर्द को,
बहा दिया था उसने 
फिर गुमसुम बैठी सोच रही थी 
उस पल को जो बीत गया था,
क्या खोया?क्या पाया?
फिर इसमें उलझी,फिर खोई सी थी......

Monday, 12 September 2011

तुम्हारे लिए वो प्यार है.....!!

होगी तुम्हारे लिए यह मेरी लिखी
सिर्फ यह एक कविता,
मेरे लिए तो यह शब्दों में जो समेट कर रखा है
तुम्हारे लिए वो प्यार है.....

जिसका हर शब्द तुम्हे पुकारता है,   
जिसकी हर एक पंक्ति,
तुम्हारे एहसासों की गवाही देती है... 
सिर्फ तुम ही नही देख पाते हो!
वरना सभी को मेरी हर कविता में,
तुम्हारी छवि दिखाई देती है...

होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
वरना सभी को हर पंक्ति में,
मेरी धडकने सुनाई देती है...

होगी तुम्हारे लिए यह कविता,
मेरी कल्पनाओं,मेरे ख्यालो में
लिखी कुछ पंक्तिया..
मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
पिरोयी हर एक पंक्ति है...
सिर्फ तुम ही नही समझ पाते हो इसकी गहरायी!
वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
प्यार की सच्चाई दिखाई देती है....

Friday, 2 September 2011

तुम्हारे है.... !!!


कुछ मैंने लिख दिए हैं,
कुछ अधलिखे हैं,
वो सारे गीत तुम्हारे है...

कुछ ख्वाब मैंने देख लिए हैं,
कुछ अनदेखे हैं,
वो सारे सपने तुम्हारे हैं...

कुछ मैंने कह दी हैं,
कुछ अनकही सी हैं,
वो सारी बाते तुम्हारी हैं....

कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने, 
कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

कुछ दिन बीत गए हैं तुम्हारी यादो के संग,
कुछ इंतजार के है,
वो सारे पल तुम्हारे हैं....
मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!