कुछ एहसासों को लब्ज़ नही मिलते,
वो सिर्फ महसूस किये जाते है......
उन्हें शब्द हम क्या दे...उन्हें अर्थ हम क्या दे.....?
जो अनजाने में इस दिल से जुड़ जाते है....
साथ होते है फिर भी तन्हाई सी रहती है,
बाते तब भी होती है..
जब खामोश हम हो जाते है.....
फिर कहाँ कुछ कहने-सुनने को कुछ बाकी रहता है,
जब एहसासों से ही एहसास समझे जाते है....
नाम उसे हम क्या दे?
जिसकी एक झलक दिख जाने भर से,
दिल को मीठी सी ख़ुशी होती है.....
क्या बतलायेंगे किसी को....?
जो न पूरी सच्ची होती है...जो न पूरी झूठी होती है......
यादे कुछ यूँ भी बन जाती है.....
जो याद नही आती सिर्फ दिल को महसूस होती है....
गुजरे लम्हों के साथ.. कुछ है जो गुजरता जा रहा है...
हलचल सी मची है दिल में.....
ख़ामोशी है...तन्हाई है....
फिर भी साथ मेरे है कोई.....
जो सपना सा... अपना सा है....
हर पल इस दिल को एहसास दिला रहा है.....





