Wednesday, 4 April 2012

सिर्फ महसूस किये जाते है......!!!


कुछ एहसासों को लब्ज़ नही मिलते,
वो सिर्फ महसूस किये जाते है......
उन्हें शब्द हम क्या दे...उन्हें अर्थ हम क्या दे.....? 
जो अनजाने में इस दिल से जुड़ जाते है....
साथ होते है फिर भी तन्हाई सी रहती है,
बाते तब भी होती है..
जब खामोश हम हो जाते है.....
फिर कहाँ कुछ कहने-सुनने को कुछ बाकी रहता है,
जब एहसासों से ही एहसास समझे जाते है....
नाम उसे हम क्या दे?
जिसकी एक झलक दिख जाने भर से,
दिल को मीठी सी ख़ुशी होती है.....
क्या बतलायेंगे किसी को....?
जो न पूरी सच्ची होती है...जो न पूरी झूठी होती है......
यादे कुछ यूँ भी बन जाती है.....
जो याद नही आती सिर्फ दिल को महसूस होती है.... 
गुजरे लम्हों के साथ.. कुछ है जो गुजरता जा रहा है... 
हलचल सी मची है दिल में.....
ख़ामोशी है...तन्हाई है.... 
फिर भी साथ मेरे है कोई.....
जो सपना सा... अपना सा है....
हर पल इस दिल को एहसास दिला रहा है..... 


Tuesday, 6 March 2012

इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.....!!!


इन रंगों से थोड़े रंग
खुशियों के लेकर,                                                
सबके जीवन में घोलूँगी मैं.....
इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.....

भूल से दुःख दिया हो जो किसी को,
अपनी हर भूल की माफ़ी मांग लूँगी मैं....
रिश्तो में रंग ऐसे घोलूँगी मैं,
हर रिश्ते को एक धागे में बांध लूँगी मैं,
इस बार होली कुछ ऐसे ही खेलूंगी मैं.....

जो छूट गये हैं उनको भी साथ ले लूँगी मैं,
जो रूठ गये हैं उनको भी मना लूँगी मैं.... 
हर रंग को अपने रंग में मिला लूँगी मैं,
इस बार होली ऐसे ही खेलूंगी मैं.....

पल-पल जाते इन पलो से कुछ पल,
अपनी मुट्ठी में समेट लूँगी मैं...
नहीं भूलूंगी ये होली,
इन पलों में जी भर जी लूँगी मैं....
इस बार होली ऐसे ही खेलूंगी मैं.....






Saturday, 3 March 2012

मैं ही नारी हूँ......!!!

मैं ही नारी हूँ....                                                                   
सदियों से मुझ पर बहुत कुछ 
लिखा गया, पढ़ा गया....
कहने वालो को भी देखा है मैंने.... 
सुनने वालो को भी देखा है मैंने.....
सोच में हूँ..........
क्यों मुझे इतना समझने....
समझाने की जरुरत पड़ी है दुनिया को?

क्या मैं अबला हूँ?
क्या मैं मजबूर हूँ?
क्या मैं कमजोर हूँ?
या सिर्फ इसलिए कि.....मैं नारी हूँ....

मैं नही समझ पायी कभी कि,
मैं तो संसार के हर घर में जीतीजागती मौजूद हूँ......
फिर मुझे समझने के लिये लोग घर के बाहर
किताबो को क्यों पढ़ रहे है....?
क्या मैं सिर्फ पढने,लिखने-सुनने का ही 
विषय बन कर रह गयी हूँ.....???????

मुझे महान देवी जैसी उपाधि देकर,
कुछ लोग एक दिन महिला दिवस तो मना लेते है,
पर घर में ही मौजूद नारी को ही भूल जाते है......

मैं उन्हें कैसे समझाऊं कि "मैं भी नारी हूँ"
मुझे बड़े-बड़े सम्मान नही,
अपने परिवार का साथ और प्यार चहिये....
मुझे देवी माँ नही सिर्फ "माँ" ही बने रहने दो....
त्याग और  समपर्ण सब मेरे कर्त्तव्य है...
इनके लिये कोई पुरूस्कार रहने दो.....

मैं क्या हूँ?
ये कही बाहर से नही समझना है...
हर घर में मौजूद "मैं ही नारी हूँ"..... 
सिर्फ इतना समझना है......



Friday, 24 February 2012

देर तक देखती रही...दूर तक देखती रही.....!!!

यूँ ही इक दिन खिड़की से जाने किसे जाते,
देर तक देखती रही....दूर तक देखती रही......


ख्यालो में खोई थी या,
खुद के अन्दर उठे सवालों में उलझी थी
मन आवाज़ दे रहा था,
पर मौन खड़ी अपलक खिड़की से उसे जाते,
देर तक देखती रही....दूर तक देखती रही.....

मेरे अन्दर से कुछ जा रहा था,
शायद मुझे छोड़ कर
रूठ गयी थी मैं खुद से...
मैं रोक लेना चाहती थी,
मना लेना चाहती थी खुद को,
जाने किस कशमकश में खड़ी उसे जाते,
देर तक देखती रही....दूर तक देखती रही.....

कुछ सवाल थे उसके,
जिनके जवाब मैं नही दे पायी थी
मैं क्यों रोकना चाहती हूँ उसको 
मैं नही कह पायी थी...
मेरी हर कोशिश नाकाम हो गयी......!!!
यूँ ही इक दिन खिड़की से उसे जाते
देर तक देखती रही....दूर तक देखती रही.....

Saturday, 18 February 2012

खुश थी जब मैं कुछ नही समझती थी......!!!

जब  मैं  नही  समझती थी,                                      
जिंदगी के मायने तब ही अच्छी  थी
ख्वाबो में जिया करती थी,
ख्यालो में खुश रहा करती थी...

खुश थी कुछ न जान कर,
अंजान थी जिंदगी की हकीकत से,
तब ही अच्छी थी ....
ख्यालो में खुश रहा करती थी...

तब न राहो की,न मंजिलो की कमी थी,
जिंदगी का हाथ पकड़ कर
ख्वाबो में चला करती थी...
ख्यालो में खुश रहा करती थी... 

आज जब जिंदगी ने मेरा हाथ पकड़ कर,
हकीकत से मिलाया है
मैंने हर सच्चाई को झूठा पाया  है ....
जब मैं अंजान थी,
इस हकीकत से तब ही अच्छी थी
ख्यालो में खुश रहा करती थी.....

तब न किसी से उम्मीदे थी,
न कुछ खोने का डर था
खुद में सिमटी,खुद में खोई थी...
अकेली थी पर इतनी न अकेली थी ..

आज पूछती हूँ मैं खुद से कि,
 मैं ऐसी तो नही थी....
खुश थी जब मैं कुछ नही समझती थी......
ख्यालो में खुश रहा करती थी.....

Monday, 13 February 2012

शायद ऐसा ही प्यार होता है....... !!!


मुझे नही पता की प्यार क्या होता है
प्यार को समझने के लिए कोई
 बहुत-बहुत बड़े-बड़े ग्रन्थ नही पढ़े मैंने 
प्यार को व्यक्त करने के लिए कोई
 बड़े-बड़े शब्द भी नही मिले मुझे
मुझे तो सिर्फ इतना पता है...
किसी का ख्याल चुपके से होटों पे मुस्कान ला देता है
कोई हवा का झोका छू कर गुजरता है
तो किसी के होने का एहसास दिला देता है
जिसके लिए सिर्फ हम दिल से सोचते है
 शायद ऐसा ही प्यार होता है.. !!!

Sunday, 5 February 2012

इतिहास भी रच सकती हूँ मैं......!!!


रंग तितलियों में भर सकती हूँ मैं......                               
फूलो से खुशबू भी चुरा सकती हूँ मैं......
यूँ ही कुछ लिखते-लिखते 
इतिहास भी रच सकती हूँ मैं......

चाह लूँ तो उस आसमां को भी
छू सकती हूँ मैं.....
देख लेना कभी आसमां पर,
बिना पंखो के बादलो  के संग भी 
उड़ सकती हूँ मैं.....

दोस्त बन जाऊं जो किसी की.....
उसे हर मुश्किल से
जीतना सिखा सकती हूँ मैं.....
हमसफ़र बन जाऊं जो किसी की,
उसकी हर राह मंजिल बना सकती हूँ मैं.....
नज़र भर कर देख लूँ जिसको,
उसे अपना बना सकती हूँ मैं.....

जज्बा तो वो रखती हूँ,                                                         
की पार पर्वत भी कर सकती हूँ मैं....
कभी देखना सागर की गहराइयो में,
लहरों के साथ गहराइयो को भी
छू सकती हूँ मैं....

मेरे प्यार,मेरे समर्पर्ण को,
मेरी कमजोरी न समझना 
मिट सकती हूँ किसी पर
तो मिटा भी सकती हूँ मैं....
खुद पर आ जाऊं तो
इस दिल को पत्थर भी बना सकती हूँ मैं...... 

जीत सको तो प्यार से जीत लेना मुझे,
प्यार में सब कुछ हार सकती हूँ मैं.....
कमजोर नही हूँ,मजबूर भी नही हूँ,
जिद पर आ जाऊं तो 
दुनिया भी बदल सकती हूँ मैं..... 

यूँ ही कुछ लिखते-लिखते 
इतिहास भी रच सकती हूँ मैं......