इतने पास हो तुम,
फिर भी तुमसे,
सरहदों की दूरियाँ लगती है.....
जितनी बेचैन करती है मुझे,
उतनी ही खुबसूरत ये दूरियाँ लगती है....
कभी ये कितनी यादे,ख्यालों को संजोती,
ये दूरियाँ लगती है....
कभी संजो कर रक्खी हर याद को बिखेरती,
ये दूरियाँ लगती है.....रिश्तो और जिन्दगी का हर रूप दिखाती,
ये दूरियाँ लगती है........
कभी नजदीकियां बढ़ा देती है..ये दूरियाँ,
कभी यादें भी मिटा देती है...ये दूरियाँ....
हमारे रिश्तो का इम्तहान सा लेती....
ये दूरियाँ लगती है.....





