न जाने कब.... यूँ साथ चलते चलते मैंने तुम्हारे कंधे पर अपना सर रख दिया था....तुमने कुछ नही कहा कभी,
फिर भी एक यकीं.. एक खुबसूरत अहसास....!
जो पहली बार महसूस किया था....तुमने इस तरह मुझे संभाला था.....
कि मैं बेफ़िक्र हो कर तुम्हारे कंधे पर सर रख कर सो गयी थी....
मैंने अपने घर के बाद अगर कही खुद को सबसे ज्यादा महफूज समझा......... तो वो तुम्हारे साथ महसूस किया....!!
ख्याल तो मैंने बहुत देखे थे, पर तुम्हारे साथ ख्याल भी हकीकत लग रहे थे .........!!!!!
आहुति






