Wednesday, 6 February 2013

पाँचवा ख़त...........Valentine Special...


न जाने कब.... यूँ साथ चलते चलते मैंने तुम्हारे कंधे पर अपना सर रख दिया था....तुमने कुछ नही कहा कभी, 
 फिर भी एक यकीं.. एक खुबसूरत अहसास....! 
जो पहली बार महसूस किया था....तुमने  इस  तरह मुझे संभाला था.....
कि  मैं बेफ़िक्र  हो कर  तुम्हारे कंधे पर सर रख कर सो गयी थी.... 
मैंने अपने घर के बाद अगर कही खुद को सबसे ज्यादा महफूज समझा......... तो वो तुम्हारे साथ महसूस किया....!! 
ख्याल तो मैंने बहुत  देखे थे,  पर तुम्हारे साथ ख्याल भी  हकीकत लग रहे थे .........!!!!!                                                                               
                                                                                                  

                                                                                   आहुति                      

                                          




Sunday, 3 February 2013

तीसरा ख़त........ Valentine sepical........

तुम्हे याद है.....यूँ ही इक दिन चलते-चलते रस्ते में 
एक बूढी भिखारिन बैठी थी.......और तुमने कुछ पैसे दिए थे.....
तुम्हे पता है......ना जाने क्यों तब से......
आज तक मैं जब भी उस राह से गुजरती हूँ.....उस बूढी भिखारिन को पैसे देने के लिए मेरे हाथ अपने आप आगे बढ़ जाते है ....पता नही कब मैं तुम बन जाती हूँ....कब तुम्हारी पसंद मेरी हो गयी....
जब से तुमसे मिली हूँ मैं खुद में तुमको जीने लगी हूँ.........
                                                                                      आहुति 

                                               
                                                         

Saturday, 2 February 2013

दूसरा ख़त........ Valentine sepical........

तुम हमेशा कहते हो ना की तुम अपनी feelings को 
शब्दों में बता नही सकते...
क्यों कि तुम्हे जताना नही आता.और एक मैं हमेशा तुमसे कहती रहती हूँ..
कि मैं याद करती हूँ तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ......ऐसा है.....वैसा है......
अपने दिल की हर बात बताती रही हूँ......
पर आज एक बात तुमसे कहना चाहती हूँ.....कि हाँ मैं तुम्हे समझती हूँ...
तुम्हारी हर अनकही बात को महसूस करती हूँ.....
पर यह भी सच है कि कभी-कभी तुम्हारी इस ख़ामोशी से डर जाती हूँ.....
मेरे इस डर को  मेरी कमजोरी ना बनने देना.....
तुम्हे पता है कि कभी-कभी हम जानते है कि हमारे बीच प्यार है .....
पर इसे जताना भी उतना ही जरुरी होता है......
जितना जिन्दगी के लिए साँसों का होना........!!!
                                                                                                                                                                         आहुति   
  
                      

Friday, 1 February 2013

पहला ख़त........ Valentine sepical........

मैं भी तुम्हारी तरह busy रह सकती हूँ.....
मैं अपने बहुत सारे कामो में तुम्हारी बहुत सारी  बाते भुला सकती हूँ.....
पर मैं ऐसा कुछ नही करती हूँ....
क्यों कि मेरे busy होने का मतलब तुम्हे भूलना नही है.....
बल्कि गुजरते हुए हर लम्हे के साथ तुम्हे याद करना है....
क्यों की मैं डरती हूँ...की सब पाने की दौड़ में मैं कही तुम्हे न खो दूँ ....
मुझे सब ना सही थोडा ही मिले पर जो कुछ मिले...
उसके मिलने की ख़ुशी तुम्हारे साथ महसूस कर सकूँ....
क्यों कि मेरी हर ख़ुशी बिना तुम्हारे साथ के अधूरी है....
तो क्यों ना कुछ पल जिन्दगी से चुरा लिये जाये.....   
                                                                    आहुति  
     
                                                       
                                                                      
          

                                                                                                                                                       

Saturday, 26 January 2013

उसने मुड़ कर देखा तो होता.........!!!

कभी तो मेरे शब्दों ने....                           
उसकी धडकनों को छुआ तो होता.....
कभी तो मेरी ख़ामोशी को.....
उसने सुना होता.....
कभी तो मेरे दिल का दर्द....
उसके दिल में उतर गया होता......
कभी तो मेरी यादो का झोका....
उसको छू कर गुजर गया होता.....
कभी तो यूँ चलते-चलते मेरे कदमो के निशां ने.....
उसके कदमो को रोका तो होता.......
कभी तो मेरी पलकों पर......
उसने अपने ख्वाबो को रखा तो होता......
मैं सच करती उसका हर ख्वाब.......
उसने मुझे पर थोडा भरोसा तो किया होता......
मैं साथ ही तो थी कभी तो......
उसने मुड़ कर देखा तो होता.........!!!

Sunday, 13 January 2013

तुम कहो तो....!!!

कुछ 'शब्द' समेटे है मैंने....तुम्हारे लिए... .                          
तुम कहो तो इन्हें पन्नो पर.........बिखेर दूँ.......

कुछ 'रंग' जिन्दगी से चुराये है.....तुम्हारे लिए... 
तुम कहो तो जिन्दगी में तुम्हारी.....भर दूँ....

कुछ 'ख्वाब' छुपा लिए अपनी आखों में....तुम्हारे लिए... 
तुम कहो तो तुम्हारी पलकों पर.....रख दूँ 

कुछ 'लकीरे' किस्मत से चुराई है....तुम्हारे लिए...
तुम कहो तो तुम्हारी हथेलियों पर....सजा दूँ .....

कुछ 'लम्हे' संजो कर रखे है.....तुम्हारे लिए 
तुम कहो तो तुम्हारे साथ.......गुजार लूँ.....

कुछ 'राहे' बना ली है.....तुम्हारे लिए... 
तुम कहो तो तुम्हे मंजिल तक.....छोड़ दूँ..... 

Thursday, 3 January 2013

तुम्हारी ख़ामोशी.......!!!


बहुत कुछ लिखवा लेती है,              
तुम्हारी ख़ामोशी.......
तुम कुछ कहते भी नही,
न जाने क्या समझा देती है....
तुम्हारी ख़ामोशी...

अब तक जो कुछ लिखा,
जो कुछ भी जाना..वो,
तुम्हारी ख़ामोशी की अभिवयक्ति थी....
मेरे अनकहे एहसासों को शब्द देती है,
तुम्हारी ख़ामोशी....
इन शब्दों का अर्थ होती है,
तुम्हारी ख़ामोशी....

मैं सोच में हूँ की तुम्हारी ख़ामोशी,
इतना क्यों बोलती है ?
मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......

तुम्हारी ख़ामोशी......