Friday, 8 November 2013

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-4

                      22.                                  

यूँ ही झरोखे से झांक कर,
हर रोज ढूंढ़ती ही तुम्हे,
अपलक हर रोज़ खामोश,
यूँ ही निहारती हूँ तुम्हे,
सुन ले न कोई यूँ ही...
मौन रह कर पुकारती हूँ तुम्हे....
                    23.
अपनी प्यारी बातो में,
तुम मुझको उलझा देते हो...
मैं समझू कुछ उससे पहले,
तुम मुझको बहला देते हो....
हार तो मैं तब जाती हूँ...
मेरे रूठने पर भी जब,
तुम सिर्फ मुस्करा देते हो........!!! 
                   24.
हम भी असर देखना चाहते है,
दिल की बातो की कब होगी,
उनको खबर देखना चाहते है.....!!!
                 25.
एहसास तो है..... 
पर उन्हें बयाँ करने के लिए शब्द नही मिल रहे है,    
ढूढ रहे है हम एक दूसरे को....
शब्द हमें नही मिल रहे है.....
या शब्दों को हम नही मिल रहे है......!!!
                26.
किसी की गलतियां बता कर,
उसे छोड़ देना बहुत आसान है...
पर उन गलतियों की वजह जान कर,
उसे माफ़ करना इतना भी मुशकिल नही है.....!!!
                 27.
चलो कुछ बाते चाँद से करते है,
कुछ यूँ आया है चाँद मेरी छत पर,
कुछ बाते कह रही हूँ मैं अपने दिल की...  
कुछ बाते चाँद भी बता रहा है तुम्हारे दिल की.....!!!
                28.
आज चाँद से तुम्हारे लिए एक सन्देश भिजवाया है,
तुम भी नज़र भर कर देख लेना...
मैंने अभी-अभी चाँद में तुम्हे ही पाया है.....!!!
               29.
आज सुबह थोड़ी ज्यादा हसीन हो गयी है.....
क्यों कि मैंने कुछ रंग तुम्हारी दोस्ती का मिला दिया है.....
कुछ तुम्हारी बातो को अपने शब्दों में सजा दिया है......
कुछ अनछुए एहसासों ने....
कुछ खुबसूरत ख्वाबो ने.....
कुछ अनकहे ख्यालो ने........
इस सुबह को और भी ख़ास बना दिया है...... !!!
                30.
तुम नही हो....फिर भी हर घड़ी तुम्हारे साथ ही गुजर रही है.......
अब क्या कहू इससे ज्यादा.....? 
कि तुम से दूर जाने के लिए भी......
मुझे तुम्हारी ही जरुरत पड़ रही है..........!!!

Tuesday, 5 November 2013

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-3

                      15.                                   

कितनी ही दूरियाँ क्यों न हो जाए...
हालत कितने ही क्यों न बदल जाए...
कितना वक़्त क्यों न कम पड़ जाए...
पर फिर भी,कुछ है जो.....
हमें एक दुसरे से जोड़े रखता है...!!!
                        16.
जिन्दगी का तो पता नही.....
पर तुम्हारे बिन जिन्दगी का इक,
लम्हा भी गुजरता नही.......!
                        17.
हर सांस के साथ तुम्हे महसूस करती हूँ मैं 
तुम्हे भूल गयी हूँ ये सच है कि ये 
झूठ मैं बार बोलती हूँ.… !!
                         18.
तुम्हारे साथ बीते पल,
तुम्हारी बातो में गुजरी राते, 
सब झूठ ही था तुम्हारे लिए 
फिर भी कितनी सच्चाई से,
 इस झूठ को जिया है मैंने....!!!
                         19.
कितने अनकहे अनसुलझे एहसासों के साथ,
तुमसे बंधी रही हूँ मैं..... 
साल-दर-साल तुम्हे चाहती रही हूँ मैं.....!!!
                         20.
इस बदलते वक़्त के साथ....
तुम तो बदलते चले गए.......पर मेरा क्या...????
न मैं बदली.....न ही मेरे लिए वक़्त बदला...........  
                          21.
समझना तो यही है.....वो कितना समझते है.....
पर क्या करे? प्यार तो उनकी नासमझी पर भी आता है......!!!

Friday, 1 November 2013

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-2

                  8.                                             
ढूढती कभी-कभी निगाहें जिसे ढूंढ़ती है, 
उसे ही देखना नही चाहती है......!! 

                 9.
नही चाहती कि बहुत लोग पढ़े मुझे,
मेरे शब्द सिर्फ तुम तक ही पहुँच जाये.. 
इतना ही काफी है....!! 

                10.
हम न जाने कब उसकी जिन्दगी का
बीता हुआ कल बन गए,
और वो आज भी हमारे आज में सामिल है.....!!

                    11.
तुम्हे प्यार करने करने की सजा खुद को देती रहती हूँ...
तुम्हे भूल न जाऊं इसलिए...
तुम्हे लिखती रहती हूँ.....!!

                     12.
ये बदलो का गर्जना......
बिजली का चमकना बहुत डराता है मुझे.......
तुम न जाने कहाँ चले गये हो,
वो तुम्हारी बाँहों में सम्हालना याद आता है मुझे.........!!

                  13.   
आज कल कुछ  भी लिखने से डरती हूँ,
 डर है कि...........
कही अपने ही शब्दों में बिखर न जाऊं......!!

                   14.
मुझे नही खबर कि तुम्हारी जिन्दगी में वो कौन सा पल है.....???
जो सिर्फ मेरे लिए हो.....
पर मेरी जिन्दगी का हर इक पल.....
सिर्फ तुम्हारे लिए है..........!!!


Saturday, 26 October 2013

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-1

                       1.
वो दूर हो कर भी मुझसे दूर न रहा कभी                  
मैं पास हो कर भी उसके पास न रही कभी.....!!!
                 
                       2.
मैंने तुम्हे कभी याद नही किया क्यों कि  
मैंने तुम्हे कभी भुलाया ही नही.......!!!


                         3.
वो दूर हो कर भी मुझसे दूर न रहा कभी,
मैं पास हो कर भी उसके पास न रही कभी......!!!

                        4.
तुमसे दूर जितना भी खुद को ले जाती हूँ,
उतनी ही तुम्हारे करीब खुद को पाती हूँ.......!!!

                       5.
कुछ इक पल और रुक जाते तो अच्छा होता,
मेरे बिना कुछ कहे ही....    
तुम समझ जाते तो अच्छा होता.....!!!


                      6.
मेरी आखों को तुम्हारा इन्तजार आज भी है.…
मैं झूठ कहूँ तो कहूँ.....
सच तो यही है......
इस दिल को तुमसे प्यार आज भी है.....!!!


                 7. 
धड़कने तो बेवजह धड़कती है,
ये किसी की सुनती कहाँ है....
लाख समझाने की कोशिश करो,
ये समझती कहाँ है.....!!!                                                    

Tuesday, 15 October 2013

ये जो ख़त मैंने तुमको लिखे है..... !!!

ये जो ख़त मैंने तुमको लिखे है.....                
बंद है इन लिफाफों में...अभी तक,
तुमने खोले ही नही......
कितने रंग-बिरंगे पन्नो पर,
सजे मेरे शब्द.....
तुमने कभी पढ़े ही नही.....!

दिल की बैचेनियों को,
धडकनों की गुस्ताखियों को....
इन खतो में गढ़ा मैंने...... 
मेरे खतो को तुम समझते,
तुम तो इन शब्दों की गहराइयों में,
कभी उतरे ही नही.......!!

सुबह के निकलने से लेकर,
शामो के ढलने तक जिक्र है.... इन खतो में, 
गुजरते लम्हों के साथ,
दिल जो करता तुम्हारी वो फ़िक्र है...इन खतो में 
बंद है कब से कितने राज़,
इन खतो में....
तुमने कभी पढ़े ही नही.....!!!

इन खतो को थाम कर कब से, 
तुम्हारे इन्तजार में बैठी हूँ.....अभी तक 
तुम उन राहो से.......कभी गुजरे ही नही.......!!!!


Monday, 7 October 2013

सीधे सरल शब्दों में, मैंने दिल की बात कही है......!!!

सीधे सरल शब्दों में,                                 
मैंने दिल की बात कही है....
सीधे सरल तरीके से,
तुम्हारे दिल तक पहुच गयी है.... 


सोच समझ कर अगर कहती मैं,
तो बात न इतनी सीधी होती...
वक़्त बहुत लगता फिर तो,
तुम्हारे दिल तक न पहुची होती...... 

होठो तक आते-आते जैसे,
कोई बात ठहर गयी थी... 
सवालो के जवाब पाते-पाते,
जैसे कोई बात उलझ गयी थी... 
अब मैंने न कुछ भी,
सुलझाने की कोशिश की है....
बस सीधे सरल शब्दों में,
सीधी-सीधी बात कही है 
सीधे सरल तरीके से,
तुम्हारे दिल तक पहुच गयी है.....

भावो और एहसासों को,
अल्फाज़ न अपने दे पायी.... 
दिल के जज्बातों को,
आवाज न अपनी दे पायी....
कहने को कुछ मैं कब से,
गहरे शब्दों को ढूंढ़ रही थी..... 
शब्द मिले न मुझको ऐसे,
हार गयी मैं.....
सीधे दिल से दिल की बात कही है.....
सीधे सरल तरीके से,
तुम्हारे दिल तक पहुच गयी है.......!!!

Tuesday, 1 October 2013

अपनी हदों से गुजर रही हूँ मैं...............!!!

अपनी हदों से गुजर रही हूँ मैं,                   
खुद से लड़ने की जिद कर रही मैं...
जाने की रौशनी की तलाश में,
गहरे अंधेरो में उतर रही हूँ मैं.... 

अभी पार समंदर कर रही हूँ मैं, 
लहरों से उलझ रही हूँ मैं..... 
खुद को खो देने के जूनून में, 
समंदर की गहराइयों में उतर रही हूँ मैं....

अभी आकाश को खुद में समेट रही हूँ मैं,
चाँद तारो से लड़ रही हूँ मैं.....
किसी को चाँद देने के जूनून में,
मैं हर हद से गुजर रही हूँ मैं....... 

अभी शब्दों को गढ़ रही हूँ मैं.... 
किसी की ख़ामोशी पढने के जूनून में,
मैं छुपे एहसासों को शब्दों में रच रही हूँ मैं........