किताबे पढ़ते- पढ़ते न जाने कब
लिया है ...!
किसी ने लबो से कुछ न कह कर
आँखों से सब कुछ कहना सीख लिया है ..!
हमने भी किसी कि आँखों से
दिल में उतरना सीख लिया है....!
अब इजहार सारे आँखों के
इशारो से होने लगे है...
दूर थे अभी तक जो हमसे..
करीब दिल के आने लगे है.....!
किसी कि अनकही बातो को
लफ्ज़ दे रहे है हम .......!
किसी कि ख़ामोशी भी हम
समझने लगे है.....
फिर धड़कने हों गयी है तेज
दिन प्यार के चलने लगे है ...!




.jpg)

.jpg)