तुझमे सिमटी सी ज़िन्दगी...
तुमसे शुरु....
तुम पर ही खत्म होती है....
दिन की शुरुवात...
तुम्हारी आखों के सपनो के,
साथ होती है...
दिन चढ़ते-चढ़ते....
तुम्हारी उलझनों को सुलझाने में,
उलझती जाती है...
शाम होते-होते...
तुम्हारे होटों पर...
मुस्कान लाने की कोशिश में ढलती है...
और रात होते-होते...
तुम्हारी पुरे दिन की,
थकान को दूर कर के...
तुम्हे सुकून की नींद...
देने में गुजरती है....
तुम्हे सुकून से सोते देख कर,
मेरी जिन्दगी के...
इक दिन के सफ़र को,
जैसे मंजिल मिल जाती है...
तुझमे सिमटी सी ज़िन्दगी...
तुमसे शुरु तुम पर ही खत्म होती है....
तुमसे शुरु....
तुम पर ही खत्म होती है....
दिन की शुरुवात...
तुम्हारी आखों के सपनो के,
साथ होती है...
दिन चढ़ते-चढ़ते....
तुम्हारी उलझनों को सुलझाने में,
उलझती जाती है...
शाम होते-होते...
तुम्हारे होटों पर...
मुस्कान लाने की कोशिश में ढलती है...
और रात होते-होते...
तुम्हारी पुरे दिन की,
थकान को दूर कर के...
तुम्हे सुकून की नींद...
देने में गुजरती है....
तुम्हे सुकून से सोते देख कर,
मेरी जिन्दगी के...
इक दिन के सफ़र को,
जैसे मंजिल मिल जाती है...
तुझमे सिमटी सी ज़िन्दगी...
तुमसे शुरु तुम पर ही खत्म होती है....