याद है तुम्हे वो चाँद की रात,
दूर तक थी चाँदनी...
अपने चाँद के साथ...
चांदनी की स्याह रौशनी में,
मैं बैठी थी थाम कर,
अपने हाथो में लेकर तुम्हारा हाथ...
याद है तुम्हे वो चांदनी रात...
तुम्हारी शरारती बातो की रात,
मेरी शरमाती आखों की रात,
तुम्हारी उँगलियों में उलझती,
मेरी उँगलियों की अधूरी बात..
याद है तुम्हे वो चाँद की रात...
मेरे बेतरतीब बिखरे हुए,
ख्वाबो की रात..
तुम्हारे साथ सिमटे पलों,
लम्हों की रात..,
वो सिर्फ महसूस करने वाले,
एहसासों की रात...
याद है वो तुम्हे चाँद की रात...!!!
दूर तक थी चाँदनी...
अपने चाँद के साथ...
चांदनी की स्याह रौशनी में,
मैं बैठी थी थाम कर,
अपने हाथो में लेकर तुम्हारा हाथ...
याद है तुम्हे वो चांदनी रात...
तुम्हारी शरारती बातो की रात,
मेरी शरमाती आखों की रात,
तुम्हारी उँगलियों में उलझती,
मेरी उँगलियों की अधूरी बात..
याद है तुम्हे वो चाँद की रात...
मेरे बेतरतीब बिखरे हुए,
ख्वाबो की रात..
तुम्हारे साथ सिमटे पलों,
लम्हों की रात..,
वो सिर्फ महसूस करने वाले,
एहसासों की रात...
याद है वो तुम्हे चाँद की रात...!!!