Thursday, 4 February 2016

Valentine day खतो की डायरी...!!!

आज रात फिर गुजरी है तुम्हारे ख़तो,
तुम्हारे ख़्यालो में,तुम्हारे ख़तो के,
इक-इक शब्द जैसे मेरे दिल की,
इक-इक बात कहते है.....
गुजरता है हर इक दिन इस ख्याल में,
कि कल तुम्हारा खत,
कितने लम्हों को संजो कर,
मेरे पास होगा..सच ही है ये ख़तो में,
तुम्हारे प्यार का अंदाज़ खूब है...
क़ि फिर आज तुम्हारा खत पढ़ा है...
मेरी हीर,
तुमसे बाते करते-करते मै भूल जाता हूँ,की मुझमे भी तुमसे कुछ कहना है, पर तुम्हारी बाते इतनी प्यारी थी, बस सुनता जाता था,कौन सा रंग तुम्हे पसंद हैं कौन सी बात तुम्हे पसंद है, मेरा कौन सा अंदाज़ तुम्हे पसंद है, सभी कुछ जानना चाहता था, या यूँ कहूँ कि मैं जानना चाहता था की मैं तुम्हारी धड़कनो के साथ धड़कता हूँ या नही....मैं जानना चाहता कि वो पल जब तुम मुझे याद मुस्करा देती हो...मैं तुम्हे बताना चाहता था,कि तुमसे बाते करने के बात भी,मेरे लिये कुछ भी तो गुजरता नही....दिल के किसी कोने में ठहर जाता है...याद बनकर..
                                                   तुम्हारा
                                                     राँझा

Wednesday, 3 February 2016

Valentine day खतो की डायरी.....!!!

सुबह से ही कुछ बेचैनी सी है,
कि एक ही बात दिल में जैसे ठहर गयी है,
कि हर रोज तुम अपने ख़तो में,
इक नए राज को बताते हो,
तुम्हारे ख़तो को पढ़ते,पढ़ते,
मैं ना जाने किन ख़्यालो में खोती जाती हूँ....
और तुम्हारा हर खत,
मुझे तुम्हारे और करीब ले जा रहा है...
मेरी हीर,
तुमसे ख़्यालो से शुरू तुम्हारे ख़्यालो पर ही खत्म मेरे शब्दों की सीमा है, मैं ना जाने कैसे तुमसे ही तुम तक ही चला जा रहा हूँ....ना जाने शब्द मुझसे खेल रहे है, या ख्याल तुम्हारे मुझसे शब्दों को संजो रहे है...मैं तो तुम्हारे ख़्यालो की बनायीं हुई, तस्वीर सा हूँ..ना मेरे शब्द मेरे है,ना मैं इनका हूँ, मेरा कुछ भी नही मुझमे, मैं तो तुम जैसा हूँ...
                                                   तुम्हारा
                                                     रांझा

Tuesday, 2 February 2016

Valentine day खतो की डायरी...,

तुम्हारे ख़तो के सिलसिलों ने जैसे,
इक एहसासों दे बांध दिया था,
हर रोज तुम्हारा ख़तो का सिलसिला,
मेरी सांसो के चलने का सबब बनता जा रहा है...
जब तक तुम्हारा खत न पढ़ लूँ...
कुछ अधूरा सा लगता है....
मेरी साँसों को तुम्हारी साँसे बनकर,
तुम्हारा खत मिला..
मेरी हीर,
जिंदगी तो मैं पहले भी जी रहा था,ये मौसम,ये हवा,ये फ़ूलो के रंग, ये शाम, ये रात सभी वही है पहले जैसी...फर्क सिर्फ इतना है कि पहले इन सभी को देख कर मैं यूँ  ही गुजर जाता था..अब ना जाने क्यों मुस्करा कर ठहर जाता हूँ....क्यों की अब हर शै में तुम्हारा एहसास महसूस करता हूँ....मैं सोचता हूँ कि अगर तुम मुझे ना मिलती तो शायद मैं जिंदगी की खूबसूरती कभी समझ ही नही पाता....सच कह रहा हूँ..,कि जिंदगी तो मैं पहले भी जी रहा था,पर तुमसे मिलकर जैसे जिंदगी  मुझे जीने लगी.....
                                             तुम्हारा
                                               राँझा

Monday, 1 February 2016

Valentine day खतो की डायरी...,

आज से पहले मुझे इतनी बैचेनी कभी नही हुई...
आज उसके ख़त का दूसरा दिन था...
रात भर ना जाने कितने ही ख़्यालो में
खोई रही,तुम्हारे खत के आज से,
पहले मुझे इतनी बैचेनी कभी नही हुई...
आज उसके ख़त का दूसरा दिन था...
रात भर ना जाने कितने ही ख़्यालो में,
खोई रही,तुम्हारे खत के इन्तजार में,
कितने ही शब्दों पिरो कर खुद से बाते करती रही...तुम्हारा खत मिला..
मेरी हीर...
मुझे नही पता कि तुम मेरी हीर कब हो गयी,कब दिल ने तुम्हे सारे अधिकार दे दिये,तुम्हारी आँखों ने कब मुझसे इक रिश्ता कायम कर लिया....शायद तभी जब तुम्हे पहली बार मंदिर की सीढ़ियों पर देखा था, और मैं अनायास ही तुम्हारे पीछे चल पढ़ा था, तुम जब आँखे बंद कर के इबादत कर रही थी, तभी मैंने अपनी आखों में तुम्हारा वो चेहरा उतर गया था...तब से आज तक तुम हीर से मेरी हीर बन गयी...
                                                    तुम्हारा
                                                     राँझा

Sunday, 31 January 2016

Valentine day खतो की डायरी...

रोज मर्रा के कामो में मैं व्यस्त,
जैसे ही कलेंडर का महीना बदला की देखा कि,
1 February है, ये तो वही महीना,
वही दिन....
जब तुम्हारा मेरे साथ ख़तो का,
सिलसिला शुरू हुआ था,
मुझे याद है....
तुम मुझे प्यार से हीर कहते थे,
आज ही के दिन तुमने मुझे,
पहला खत दिया था,जिसको मैंने इतने बार पढ़ा था,
कि उस खत का इक-इक शब्द,।जैसे जहन में उतर गया, जिसमे लिखा था...
मेरी हीर,
आज के दिन से मैं तुम्हे हर रोज इक खत लिखूंगा...valentineday तक.... तुम्हे लिखूंगा किस तरह तुम मेरे ख़्यालो में रहती हो...तुम्हे लिखूंगा कि अपनी feelings को बताने के लिये,मेरे इक खत काफी नही है..मैं तुम्हारे करीब खुद को इन ख़तो के सिलसिलों से ले आऊंगा...जिसकी खुसबू तमाम उम्र तुम्हारे साथ रहेगी....
                                                  सिर्फ तुम्हारा
                                                    राँझा

Tuesday, 12 January 2016

मेरे शब्दों के है.......,!!!

तुमसे रिश्ते मेरे सभी...
शब्दों के है....
तुमने सुना नही कभी,
मैंने कहा नही कभी.....
तुम पढ़ लेते हो मुझको,
मैं लिख लेती हूँ तुमको..
तुमसे एहसास मेरे सभी....
शब्दों के है....
हम सदा अंजान ही रहे इक दूजे से,
तुम मिल लेते हो मुझसे
मैं छु लेती हूँ तुमको,
तुमसे बयाँ करते जज्बात मेरे सभी,
शब्दों के है....
इक दुरी सी थी हमारे दरमियाँ,
इक गहरी खामोशी की तन्हाईयाँ,
तुम्हारे सवालो के जवाब सभी,
मेरे शब्दों के है.......!!!

Friday, 8 January 2016

तुम भी इस घर में आते हो....!!!

जब भी रात में दरवाज़े के हिलने की,
आहट सी रहती है...
यूँ ही लगता है कि....
जैसे हवा के झोंके के साथ...
तुम भी इस घर में आते हो.....
तुम्हे याद है घर का वो लॉन...
जिसकी बगियाँ को,
तुमने सींचा था,
मुझे याद है कि...
तुम अपनी क्यारी के फ़ूलो को,
मेरे नाम से पुकारते थे...
हवा के झोकों से जब वो झूलते है..
तो यूँ लगता है कि...
तुम भी इस घर में आते हो....
तुम्हे याद है वो किचन,
जिसमे कितनी ही बार तुमने,
वो अदरक वाली चाय बनायीं थी,
हवा में आज भी उस चाय की,
खुसबू महसूस करती हूँ..
तो लगता है...
तुम भी इस घर में आते हो...
तुम्हे याद है वो दर्पन,
जिसमे मैं जब सजती संवरती थी,
वो तुम्हारा पीछे से,
मुझे बाँहो में भर लेना...
हवा के झोकों में वो परछाइयाँ,
आज भी दिखती है..
तो लगता है कि...
तुम भी इस घर में आते हो..
तुम्हे याद है वो खिड़की,
जिससे मैं घंटो चाँद को निहारती थी...
आज भी जब खिड़की के पर्दे,
हवा में लहरा कर मुझे छूते है..
तो लगता है कि...
तुम भी इस घर में आते हो.....
तुम्हे याद है वो तकिया,
जिससे कितनी ही लड़ाईया,
तुमने हारी...मैंने जीती है....
मैं जब भी हवा के झोकों में,
तुम्हे अपनी सांसो में पाती हूँ...
तो तकिया को समेट कर,
अपने सीने से लगा लेती हूँ....
जब भी रात में दरवाज़े के,
हिलने की आहट सी रहती है..
यूँ ही लगता है कि...
जैसे हवा के झोंके के साथ,
तुम भी इस घर में आते हो.....