Monday, 2 December 2019

शादी की डायरी....कुछ यूं शरू सिलसिला हुआ.. !!!

कुछ कहुँ तुमसे....तुम कुछ बदले से लगते हो.
पता नही पर पहले से ज्यादा,
या यूं कहुँ कि सिर्फ मेरे अपने से लगते हो...
वक़्त तो पहले भी गुजारा है तुम्हारे साथ,
पर अब जो साथ होते हो,बहुत खास से लगते हो....
ना कब से पर अब...
तुम्हारा अधिकार सा मुझ पर लगता है...
कुछ बढ़ से गया है या..
गहरा हो गया प्यार सा लगता है...
अब रंग सारे तुम्हारे मुझे भाते है,
रिश्ते सभी तुम्हारे मुझे जिंदगी जीना सिखाते है..
बस सोच में तब से.. कि मैं निभा पाऊंगी..
यकीनन तुम जो साथ होते हो तो,
कुछ नामुमकिन नही लगता है....!!!

Tuesday, 19 November 2019

ये गुजरता हुआ वक़्त...!!!

शादी एक ख्वाब....
जिंदगी की नई शुरुआत..
और तब और भी खूबसूरत,
जब खुद की मर्जी भी शामिल होती है....
इक मुस्कराहट, इक चमक,धड़कता दिल,
घबराती सांसे....ऐसा ही कुछ होता है....
जिम्मेदारियां, नए रिश्तो को संजोने की ललक....
मैं तो इन सब के लिए तैयार हो गयी हूँ,
या यूं कहुँ तुम्हारे साथ के साथ सब कर लुंगी,
निभा लुंगी...ये यकीन है ये शादी.....
पर शायद तुम बिखरे हुए हो,
जिंदगी को हम समेटने जा रहे है,
जो भी बिखरा हुआ है,
उसे व्यवस्थित करने जा रहे है...
पर तुम ना जाने किन उलझनों में उलझे से हो,
मेरा साथ तो थाम लिया है..
पर शायद इस रिश्ते पर यकीन नही कर पा रहे हो,
या डरे हो उस आने वाले पल से....
मेरा हाथ तो पकड़ लिया है,
पर हाथ पकड़ चलने में डर रहे हो,
डर रहे हो कि कैसे जिंदगी खूबसूरत होगी,
या नही होगी...तुम वो सब सोच रहे हो,
जो हुआ ही नही,और शायद होगा भी नही...
बस उलझे जा रहे हो,
यूँ खुद की बनाई उलझनों में...
अभी भी वक़्त है,
जिंदगी के खूबसूरत पलो को जी भर जी लो...
ये उलझने तो यूँ ही बनी ही रहेंगी....
नही रहेगा तो बस ये गुजरता हुआ वक़्त...!!!

Monday, 9 September 2019

मेरी सारी उपलब्धियां तुम्हारी हो....!!!

इक कहानी सिर्फ तुम्हारी मेरी हो...
जिसमे तुम हँसते हो तो,मैं हँसती हूँ,
तुम उदास जो हो..तो मैं भी उदास होती हूँ...
इक लम्हा सिर्फ तुम्हारा मेरा हो,
जिसमे तुम गुनगुनाते हो,
तो मैं तुम्हारा संगीत बन जाऊं,
इक नजारा सिर्फ तुम्हारा मेरा हो,
तुम्हे देखती वो नज़र मैं बन जाऊं...
इक रस्म सिर्फ मेरी और तुम्हारी हो,
राह चाहे कोई भी हो,सफर कैसा भी हो,
तुम आगे जो चलो,तुम्हारा हाथ थाम कर,
तुम्हारे साथ मैं भी चलूँ..
इक वादा सिर्फ मेरा और तुम्हारा हो,
वक़्त चाहे जैसा हो,हालात चाहे जैसे हो,
ना मैं तुम्हारा साथ छोडूं,ना तुम्हे खुद से दूर जाने दो... इक एहसास सिर्फ मेरा और तुम्हारा हो,
किसी भी दुख में हम इक दूसरे को,
सांत्वना दे सके या नही,
पर साथ बैठ कर जी भर रो कर..
इक-दूजे को सम्हालते रहे...
इक कसम सिर्फ मेरे और तुम्हारी हो,
छोड़ कर एक-दूसरे का साथ,
हम कभी जाए..
सांसे जितनी भी इक-दूजे के जीवन से बंधी रहे..
पर हाँ एक बात सिर्फ मेरी हो,
तुम्हारे सारे दुख,तुम्हारी सारी असफलताएं,
तुम्हारी हर कमजोरी मेरी हो...
मेरी सारी खुशियाँ,
मेरी सारी उपलब्धियां तुम्हारी हो....!!!

Wednesday, 14 August 2019

तुम्हारा जन्मदिन मेरे लिए....!!!

तुम्हारा जन्मदिन मेरे लिए,
इक उत्सव की तरह होता है..
सूरज तो रोज़ की ही तरह निकलता है ,
पर आज कुछ अलग सा महसूस होता है...
सभी रंग कुछ अलग निखर कर दिखते है..
सब कुछ होता तो और दिनों की तरह पर
तुम्हारा जन्मदिन मुझे नाचने,
मुस्कराने कुछ अलग सा करने को मन करता है..
क्यों दीवाली की तरह दीपो की लड़ी लगा दूँ..
रौशन तुम्हारा हर दिन हो ,
हर दीपक तुम्हारे नाम के सजा दूँ...
मुस्कराहटें तुम्हारे होठो पर,
सारी दुनिया की सजा दूँ..
मुमकिन हो तो अपनी जिंदगी का हर दिन तुम्हारे जन्मदिन के साथ जोड़ दूँ...
उम्र तुम्हे लग मेरी भी,
दुआए सारी तुम्हारे लिए मांग लूं...!!!

Tuesday, 23 July 2019

इशारे समझ जाते....!!!

पैरों में पाज़ेब बांध कर मैं तुम्हारे आंगन में,
झूमना चाहती हूं...
घुंघुरुओ की छम-छम के साथ,
तुम्हारे सुरों को अपने सुरों में पिरोना चाहती हूं....
मैं तुम्हारी तुम्हारी बातो का जवाब,
अपने घुंघुरुओ की छम-छम से देती,
तुम मेरे घुंघुरुओ के लहजे से समझ जाते,
अंदाज़ मेरे रूठने और मानने के..
कभी जो ना छनकती मेरे घुंघुरुओ की आवाज़,
तो मेरे उदास होने के इशारे समझ जाते....!!!

Sunday, 9 June 2019

फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..!!!

तुम्हे आज लिखती हूँ मैं,
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं...
उजली सुबह लिखती हूँ मैं,
ढलती शामे लिखती हूँ मैं..
गहरी खमोश राते लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
मन की पगडंडियाँ,
सँकरी गालियां लिखती हूँ मैं,
मेरी तुम्हारी प्रेम की गवाह,
सहेलियां लिखती हूँ मैं...
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
सिरहाना धरती का लिखती हूँ मैं,
बाहें आसमान की लिखती हूँ मैं..
गले लगा कर भिगोती बारिशें लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
खूबसूरती चाँद सी लिखती हूँ मैं,
बेरुखी सूरज सी लिखती हूँ मैं...
सुकून तुम्हारे साथ जिंदगी लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..!!!

Saturday, 8 June 2019

बैठी हो साथ मेरे...!!!

उम्र के इस पड़ाव में उसका साथ छूट जाना,
तब सिर्फ सांसे चलती है,
जीना तो वो अपने साथ ले जाता है...
बहुत अरमानो से हमने घर बनाया था,
इक-दूसरे के प्यार में एक-दूसरे के,
रिश्तो को सम्हाला, संजोया..
बहुत खुशिया,दर्द,अधूरी चाहते,
समेट अपने अंदर..और मेरे तुम्हारे रिश्तो को,
हमने को हमारे रिश्ते बना कर,
रूठते,मनाते इक उम्र गुजारी थी हमने...
कुछ ख्वाइशें मैंने तुम्हारी पूरी कर दी थी,
उम्र इस पड़ाव पर,
और कुछ ख्वाइशें पूरी करने का,
वादा किया था,उम्र के उस पड़ाव पर.
हमने मिल कर सोचा था,
जब सारी जिम्मेदारियां पूरी हो जएँगी,
तब हम सिर्फ इक-दूसरे की ख्वाइशें पूरी करँगे,
तुम जो कहोगे वो मैं तुम्हारे लिए खाने में बनाऊंगी,
मै जो कहँगी वो तुम मेरे लिए लाओगे...
यही तिनको को जोड़ कर रखा था,
इक-दूसरे के लिए..बहुत सारी बाते तो,
अभी भी सीने में अभी भी छिपी थी..
तुमसे कहनी थी यूँ फुरसत में,
गार्डन में बैठ कर,तुम्हारे हाथों की...
एक कप चाय पीते-पीते...
यही फुरसत के पलो का,
इंतजार ही तो कर रहे थे,दोनो साथ-साथ,
अब साथ कहाँ रहा साथ मेरे,
तुम्हारे साथ कि तलाश,
मैं घर का कोना तलाशता हूँ,
जिस तरह तुम करीने से सवांर कर रखती थी चीजे,
मैं भी उन्हें रख देता हूँ,जब थक कर बैठ जाता हूँ,
तुम्हारे साथ कि तलाश करते-करते,
तभी इक पल के लिए ये महसूस होता है,
कि तुम आ कर मेरे काँधे पर,
सर रख कर बैठी हो साथ मेरे...!!!