Monday, 25 January 2021

ऐसा है साथ हमारा....!!!

हमारे तुम्हारे साथ को कभी साबित करने की जरूरत नही होगी,क्यों कि जो साबित किया जाये को साथ ही नही है...प्यार तो सिर्फ महसूस किया जाता है,जो किसी तोहफे से बयां नही किया जाता है...प्यार का विश्वास तो तुम्हारी आँखों मे दिखता है,जो कहने से समझा नही जाता, जरूरी ये भी नही कि जो तुम्हे पसंद हो वो हमें भी पसंद हो,और जो मुझे पसंद हो,वो तुम्हे भी पसंद हो...पर हमें एक दूसरे की पसंद और इच्छा का सम्मान करना आना चाहिए...हमारा साथ में किसी भी जबरदस्ती के लिए कोई जगह ना हो...सहज ही एक दूजे की बातों को समझना ही प्यार है...जहाँ एक दूजे के परिवार का सम्मान बिना कहे हम एक-दूसरे के लिए करते रहे..ना तुम्हे कोई शिकायत हो,ना मुझे कोई शिकवा हो....
ऐसा है साथ हमारा....

सब खत्म होते देखते रहते है...!!!

कुछ तकलीफे हमको खामोश कर देती है...एक अजीब सी उदासी हर वक़्त रहती है,पता है कि अब इस दर्द के साथ ही जीना है,पर मन फिर भी चाहता है,वक़्त थोड़ा पीछे चला जाता,जो छूट रहा था हमारे हाथों से हम उसको रोक लेते,नही रोक पाते तो कुछ तो समेट लेते उसके बिना जीने की वजह ही बना लेते...पर नही होता है कुछ भी,ना हम कुछ बदल सकते है,ना ही दर्द को कम किया जा सकता है...बस शांत हो जाते है,और सब खत्म होते देखते रहते है...

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-43

411.
कभी-कभी चीजे तो वही रहती है,
सिर्फ उनकी जगह बदल देने से भी नयापन आ जाता है...

412.
कुछ तुम्हारे किये वादे...
मैं पूरे कर रही हूँ...☺

413.
ना जाने क्यों मन बहुत बेचैन है कुछ खो देने का डर है,...कुछ पाना भी चाहती हूं,बहुत सिद्दत से,...पर कुछ चाहते गर पूरी भी हो जाये,तो उनके पूरे होने से डर लगता है...ये बहुत कम होता है,पर एक बार जीवन मे जरूर होता है...जब आप जो पाना चाहते है,पर पाना नही चाहते है...ये भी अजीब एक कशमकश रहती है...

414.
हादसे जब तक दूर से दिखते है तो सिर्फ तकलीफ होती है,पर जब खुद की जिंदगी में हादसे होते है,तो वो दर्द महसूस होने लगते हैं...तब पता चलता है,कि दुनिया की किसी भी डिक्शनरी में नही होते है वो शब्द जो हमे दिलासा दे सके..हम बैठ कर रो सकते है....और वक़्त के गुजरने का इंतजार करते है...
415.
कुछ तकलीफे हमको खामोश कर देती है...एक अजीब सी उदासी हर वक़्त रहती है,पता है कि अब इस दर्द के साथ ही जीना है,पर मन फिर भी चाहता है,वक़्त थोड़ा पीछे चला जाता,जो छूट रहा था हमारे हाथों से हम उसको रोक लेते,नही रोक पाते तो कुछ तो समेट लेते उसके बिना जीने की वजह ही बना लेते...पर नही होता है कुछ भी,ना हम कुछ बदल सकते है,ना ही दर्द को कम किया जा सकता है...बस शांत हो जाते है,और सब खत्म होते देखते रहते है...

416.
कुछ दर्द कभी भी बांटे नही जा सकते,ना ही उनके लिए कोई दिलासा होता है..
बस असहाय से हम उसके दर्द के साथ बैठ कर रो लेते है..

417.
पूरी जिंदगी खर्च हो गयी सिर्फ अच्छा बने रहने में...
आखिर में अच्छा हुआ कुछ नही...

418.
एक स्त्री चाहे कितना ही क्यों ना समर्पित हो जाये...
पर एक पुरुष उसे अपनी शर्तों पर ही साथ चाहता है...
पुरुष हमेशा उस स्त्री का विकल्प ढूंढ़ता रहता है...

419.
कुछ बारिशें बरसना तो चाहती है...
पर ना जाने किसके इंतजार में ठहरी हुई सी है....

420.
डर लगने लगा है तुम्हारी उम्मीदों पर खरे उतरने का वादा करने से,ना जाने क्यों खुद से उम्मीदे बहुत ज्यादा रही नही है...आत्मविश्वास हिल से गया है....गलत तो कुछ न हुआ है..पर सही भी कुछ नही है...डर लगता है कि क्या कुछ सही हो पायेगा,या जिंदगी यूँ ही गुजर जएँगी...सही और गलत को समझते-समझते.....

बस आसान कुछ नही होता,सिर्फ मुश्किल नही होने देते......!!!

जिंदगी में किसी से प्यार हो जाना,और फिर as a friend से as a wife हो जाना आसान नही होता...बहुत कुछ जो पहले आसान लगता है,एक दोस्त बन कर,वो एक पत्नी के रूप में मुश्किल हो जाता है... हम होते वही है,बस कुछ एहसास गहरे हो जाते है...और अधिकार बढ़ जाते है....जिम्मेदारियां दोनों की एक ही हो जाती है,हाँ एक बात जरूर होती...कम कुछ नही होता....बस बढ़ता जाता है......😊प्यार विश्वास एहसास जिम्मेदारी....😊साथ हम होते है,हमारे साथ के साथ बहुत रिश्ते टिके होते है....बस साथ चलते-चलते पूरी  जिंदगी का सफर तय कर लेते है.....बस आसान कुछ नही होता,सिर्फ मुश्किल नही होने देते.......

हमे किसी मे कोई कमी क्यों दिखती है...!!!

हमे किसी मे कोई कमी क्यों दिखती है,क्यों कि हम सामने वाले को अपनी सोच के अनुसार जज करते है..थोड़ी देर में ही सही पर मुझे भी महसूस हुआ कि मैं गलत हूँ, यदि प्यार,परिवार,रिश्ते,ईमानदारी, कमिटमेंट ये सभी कुछ मेरी pairorty है.. सामने वाले के लिए भी वही हो,ये जरूरी नही...उसके लिए कुछ और बाते होंगी जो जरूरी होंगी,पर हम बिना वो समझे किसी को गलत और सही ठहरा देते है...आज एक बात समझ आयी कि सभी अपनी-अपनी जगह सही होते है,अपने-अपने नजरिये से...फिर क्या ...आज ही हमने भी ठान लिया कि किसी को भी अपनी नजरिये से नही जज करँगे...सच्ची...ये मान लेना भी बहुत खूबसूरत एहसास है...ऐसा लगता है जैसे कोई बोझ सा था दिल मे...

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-42

398.
कुछ हादसे जिंदगी में ऐसे भी होते है...
वो क्यों हुए ये समझने के लिए पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है...

399.
कोई चीज भी मिलती नही मुकम्मल यहां..
खुशिया भी अधूरी ही आती है,...

400.
सब कुछ तारीखों में कहाँ सिमट पाता है....चाहे जितना समेटो, कुछ ना कुछ छूट जाता है....

401.
कुछ लम्हे कभी नही बदलते ...
बस वो ठहर जाते है...
बदलते है तो बस तारीखे और कलेंडर...l

402.
किसी खुशी को एक डर में जीना...
जानते है कैसे लगता है, 
शायद बहुत कम लोग इस एहसास से गुजरे होंगे...
जहां पर हर पल ये डर होता है,वो खुशी न कब आप से दूर हो जाये... 
एक मजाक सी जिंदगी बन जाती है...
जब हर लम्हा खो जाने के डर में हम वो खुशी जीते है..

403.
रिश्ते बनाना बहुत आसान होता है..
रिश्तों में हमेशा जान बनी रहे...
हमेशा सोने की तरह खरे रहे,इसके लिए....
इन रिश्तों के लिए तपना पड़ता है...कुछ लोग ऐसे भी देखे है हमने रिश्ते निभाने में तो बहुत पीछे रहते है,पर परवाह करने का ढोंग बहुत अच्छे से कर लेते है....ऐसे लोगो से सतर्क रहें,और सावधान रहें.....

404.
तुम्हे भेजी है लिफाफे में भर कर प्यार की गर्माहट...
यही है तुम्हारे लिए मेरी सर्दियों की चिट्ठीया.. .

405.
आ जाओ आज कुछ बाते चाय पर हो जाये,
दिसम्बर का महीना भी है...
गुजरा वक्त फिर रिवाइंड कर लिया जाए...
शिकायतें सारी जो पूरे साल तुम्हे मुझसे रहती है..
मैं रख लूंगी अपने पास,
तुम बस एक दफा चाय पर आ जाना...

406.
चल दिसम्बर तुम्हारा हाथ पकड़ कर बिठा लूं...
अभी तो गुजरे साल का तुझसे हिसाब बाकी है....

407.
कुछ ख्वाइशें ऐसी भी होती है,
जो चाहते तो है कि पूरी हो जाये,पर पूरी होने से भी डर लगता है...जिंदगी ऐसे भी मोड़ लाती है....

408.
कुदरत हमसे हर ख्वाइश की कीमत ले ही लेती है..
किसी ना किसी रूप में..
 डर सा लगता है कुदरत से कुछ भी मांगने से,
ना जाने वो उस ख्वाइश की क्या कीमत लगा ले.....
कहते है ना मुकम्मल तो कुछ भी नही मिलता.. .

409.
कभी तुम्हारी बातो से बुनी थी,
जो कहानी...पुरी हो ना हो...
तुम्हारी मुस्कराहटों से,
पूरी जिंदगी हो जायेगी..
मेरी आँखों से शुरू तुम्हारी आँखों पर खत्म..
ये कहानी मेरे शब्दो में सदियों तक पढ़ी जायेगी..

410.
क्यों ना इस बार सफाई उन शिकायतों की जाए जो बेवजह कुछ रिश्तों पर भारी है....


दर्द खुशियों में लिपटा हुआ आ रहा है.. !!!

आज हमने दर्द को एक नए रूप-रंग अंदाज़ में देखा है..खुशियों में लिपट कर हमको मिल रहा है...
और शर्त भी रखी है,कि मुस्कराना होगा... कुछ लोग तो ऐसे भी है,जिन्हें वो सब मिला जो वो चाहते थे...फिर भी उन्हें दर्द है इस बात का जो मिला वो चाहा ही क्यों था...और अगर चाहा भी था,तो मिल ही क्यों गया.. .कुछ लोग ऐसे भी है जिनके रिश्ते जुड़ नही पा रहे रहे और कुछ लोग ऐसे भी जिन्हें रिश्ते,प्यार,परिवार सब मिल गया...तो वो उसे सम्हाल नही पा रहे है.....किसी को अपनी खुशियों की कीमत देनी पड़ रही है,तो कोई खुशियों की कीमत लगा रहा है...दर्द में हर कोई है...किजी से ईश्वर ने सब छीन लिया है,तो कोई खुद को ही दर्द पहुँचा रहा है....दर्द  खुशियों में लिपटा हुआ आ रहा है.. #आहुति#